रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है | रक्षाबंधन का धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व

Raksha Bandhan 2018 - दोस्तों आज हम बात करेंगे एक महत्वपूर्ण त्यौहार " रक्षा बंधन " के बारे मे, भारत एक विशाल और सांस्कृतिक देश है। भारत में विभिन्न जाती, धर्म के लोग रहते है। भारत त्योहारों का देश भी माना जाता है, यहा पर विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है। उनमेसे रक्षाबंधन भी एक हिंदुओं का एक महत्त्वपूर्ण त्यौहार है, जो भाई-बहनों के बीच मनाया जाता है। भारत के अलावा विश्व भर में जहा पर हिन्दू धर्म के लोग रहते है वहा पर वो बड़े धूमधाम से रक्षाबंधन यह त्यौहार मनाते है। रक्षाबंधन त्यौहार में " रक्षा धागा " या " राखी " का अधिक महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि राखी के यह रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बंधन को मज़बूत कर देते है। रक्षाबंधन इस त्यौहार का भारतीय समाज में सामाजिक महत्व तो है, लेकिन इसका धार्मिक, ऐतिहासिक भी महत्व है। तो दोस्तों रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है ये आज हम इस पोस्ट में जानेंगे।


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रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है :-

हिन्दू श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला " रक्षाबंधन " यह त्यौहार भाई का बहन के प्रति प्यार और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। यह त्यौहार " श्रावणी " या " सलूनो " के नाम से भी जाना जाता है। इस त्यौहार के दिन महिलाएँ और लड़कियाँ सुबह जल्दी उठकर स्नान करके नये वस्त्र पहनकर पूजा के लिए एक थाली सजाती है। उस थाली में राखी, हल्दी, दिया और मिठाई रखती है। लड़के और पुरुष भी नये वस्त्र पहनकर पूजा के लिए किसी विशिष्ठ जगह पर बैठते है। पहले घर के अभीष्ट देवता की पूजा करने के बाद बहन अपने भाई का टीका करके उसके दायें हाथ पर रक्षा धागा या राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र के लिए कामना करती है और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन लेता है और सुख दुःख में साथ रहने का विश्वास देता है। भाई अपनी बहन को उपहार देता है या फिर उपहार के बदले पैसे भी दिए जाते है।

रक्षाबंधन त्यौहार के विधि को पूरा करने के बाद भोजन किया जाता है। हर त्यौहार की तरह इस त्यौहार पर भी घर में विशेष पकवान बनाये जाते है। ऐसा माना जाता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बंधन को मज़बूत कर देते है, लेकिन ऐसा नहीं है राखी सिर्फ बहन की रक्षा करने के लिए ही नही बांधी जाती बल्कि देश की रक्षा के लिए, पर्यावरण की रक्षा के लिए भी राखी बांधने की परंपरा चालू हुई है। 


सामाजिक महत्व :-

हर साल रक्षाबंधन इस त्यौहार के लिए लड़कियाँ कुछ दिन पहले से ही तयारी करती है जैसे नये कपड़े खरीदना, राखी लेना आदि और भाई भी अपने बहन को उपहार में कुछ देने के लिए कुछ तयारी करता है। विवाहित बहने भी रक्षाबंधन के लिए अपने भाई को राखी बंधवाने आती है। सगे भाई बहन के अलावा भी कुछ रिश्ते ऐसे होते है जो भावनाओं से जोड़े जाते है और ऐसेही कुछ भावनात्मक रिश्ते भी इस पर्व से बंधे होते है। इस त्यौहार से दो परिवारों का पारस्परिक योग होता है।

रक्षाबंधन इस त्यौहार से आत्मीयता और स्नेह के बंधन से रिश्तों को मज़बूती मिलती है। इस अवसर पर सिर्फ बहन ही भाई को राखी नही बांधती बल्कि गुरु अपने शिष्य को या फिर शिष्य गुरु को राखी या रक्षा सूत्र बांध सकता है। प्राचीन काल में जब शिष्य अपनी शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरुकुल छोड़ के चला जाता है तब वह अपने गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए उन्हें रक्षा सूत्र बांधता था और गुरु भी अपने शिष्य को रक्षा सूत्र बांधता था, इसलिए की शिष्य ने जो ज्ञान प्राप्त किया है उसका वो भावी जीवन में सही उपयोग कर सके। इसलिये रक्षाबंधन इस त्यौहार को  भारत के गुरु-शिष्य की परंपरा के प्रतीक का भी त्यौहार माना जाता है। इसी प्रकार दोनों ही अपने सम्मान की रक्षा करने के लिए एक-दूसरे को अपने बंधन में बांध देते है।

रक्षाबंधन इस त्यौहार पर शंकरपारे, नमकपारे, घेवर, घुघनी जैसे पकवान घर में बनाये जाते है। हलवा और खीर भी इस त्यौहार का लोकप्रिय पकवान है। घेवर यह सावन का विशेष पकवान है जो सिर्फ हलवाई ही बनाते है, शंकरपारे और नमकपारे घर में बनाते हैं। काले चने को उबालकर घुघनी को छौंका जाता है और इसे पूरी और दही के साथ खाते हैं।

धार्मिक महत्व :-

धार्मिक दृष्टि से रक्षाबंधन इस त्यौहार का बहुत महत्व है। महाराष्ट्र में रक्षाबंधन यह त्यौहार " नारियल पूर्णिमा " या " श्रावणी " के नाम से प्रसिद्ध है। इस अवसर पर स्वामी वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिए नारियल अर्पण करने की परंपरा है और इस दिन मुंबई के समुद्र के तट नारियल से भर जाते है। लोग इस दिन समुद्र या नदी पर जाकर उसकी पूजा करते है। अमरनाथ की धार्मिक यात्रा गुरु पूर्णिमा के दिन से शुरू होती है और रक्षाबंधन तक रहती है। कहा जाता है की, इस दिन यहा के हिमानी शिव लिंग अपना पूर्ण आकार प्राप्त कर लेता है और यहा पर हर साल मेले का आयोजन भी होता है।

भगवत पूराण और विष्णु पुराण में जब भगवान विष्णु ने राजा बलि को हराकर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया तब राजा बलि ने भगवान विष्णु के महल में रहने का आग्रह किया और उन्होंने बलि को रहने के लिए कहा। लेकिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी को उन दोनों की मित्रता अच्छी नही लग रही थी, तो आखिर भगवान विष्णु और राजा बलि ने वैकुण्ठ जाने का निर्णय लिया। लेकिन माँ लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बाँधा और राजा बलि को अपना भाई मान लिया। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। राजा बली ने लक्ष्मी को उपहार कुछ मांगने को कहा, तो लक्ष्मी ने उपहार में कहा की वो भगवान विष्णु को अपने महल में रहने के लिए कहेंगे, राजा बलि ने यह बात मान ली और भगवान विष्णु को अपने महल में रहने के लिए लेके आये और लक्ष्मी को भी बहन के रूप में स्वीकार कर लिया।


ऐतिहासिक महत्व :-

रक्षाबंधन का महत्व इतिहास में भी कुछ घटनाओं के आधार पर उल्लेखित किया गया है। इसके बहुत से उदाहरण देखने को मिलते है। सिकंदर की पत्नी रोशानक ने अपने पति के शत्रु पोरुस को राखी बाँधकर उन्हें अपना भाई मान लिया और उपहार में उनसे युद्ध के समय सिकंदर पर जानलेवा हमला न करने का वचन लिया। परंपरा के अनुसार पोरुस ने युद्ध के समय अपनी कलाई पर बंधी हुई राखी और अपनी बहन याने सिकंदर की पत्नी रोशानक को दिए हुए वचन का मान रखकर सिकंदर को जीवन दान दिया। 

महाभारत में जब ज्येष्ठ पांडव युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से सवाल किया कि मैं अपने संकटों को कैसे दूर कर सकता हूँ, तब भगवान कृष्ण ने उनकी और उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी, क्योंकि उनका कहना था की, राखी यह सिर्फ एक धागा ही नही बल्कि वह शक्ति है जिससे आप अपने सभी संकटों से मुक्त हो जायेंगे। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशु पाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आयी, उस वक्त द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी, उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। इसके बदले में कृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर उनकी रक्षा की। इसी कारण से परस्पर एक दूसरे की रक्षा करने की और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के त्यौहार से चालू हुई।

दोस्तों आशा करते है की इस पोस्ट में अपने भारत का यह महत्वपूर्ण रक्षाबंधन त्यौहार अपने जीवन में क्या महत्व लाता है और रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई को राखी या रक्षा धागा क्यों बांधतीं है, रक्षाबंधन का सामाजिक महत्व, धार्मिक महत्व, और ऐतिहासिक महत्व इत्यादि की जानकारी अच्छी लगी होंगी। अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो अपने दोस्तों में शेअर करे और आपको रक्षाबंधन इस त्यौहार के बारे में कुछ ओर जानकारी मिले तो हमे कमेन्ट करके बताये।

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